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Jai Shiva Shambhu: The Divine Essence of Lord Shiva

1. Introduction    - Briefly introduce the significance of Lord Shiva in Hinduism.    - Explain the mantra "Jai Shiva Shambhu" and its meaning. 2. Lord Shiva: The Deity of Transformation    - Explore the various aspects and symbolism associated with Lord Shiva.    - Discuss how Lord Shiva represents destruction and rebirth, emphasizing the cyclical nature of existence. 3. The Stories and Myths    - Share some of the most well-known stories and myths surrounding Lord Shiva.    - Highlight key episodes from the Puranas and epics that showcase his divine attributes. 4. The Significance of "Jai Shiva Shambhu"    - Explain the meaning and importance of chanting "Jai Shiva Shambhu."    - Discuss how this mantra is used in prayers, meditation, and devotional practices. 5. Lord Shiva's Iconography    - Describe the physical appearance of Lord Shiva and the symbolism behind his attributes (e.g., the third e...

केदारनाथ कस्बा

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केदारनाथ हिमालय पर्वतमाला में बसा भारत के उत्तरांखण्ड राज्य का एक कस्बा है। यह रुद्रप्रयाग की एक नगर पंचायत है। यह हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के लिए पवित्र स्थान है। यहाँ स्थित केदारनाथ मंदिर का शिव लिंग १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिन्दू धर्म के उत्तरांचल के चार धाम और पंच केदार में गिना जाता है। श्रीकेदारनाथ का मंदिर ३,५९३ मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊँचाई पर इस मंदिर को कैसे बनाया गया, इस बारे में आज भी पूर्ण सत्य ज्ञात नहीं हैं। सतयुग में शासन करने वाले राजा केदार के नाम पर इस स्थान का नाम केदार पड़ा। राजा केदार ने सात महाद्वीपों पर शासन और वे एक बहुत पुण्यात्मा राजा थे। उनकी एक पुत्री दो पुत्र थे । पुत्रका नाम कार्तिकेय (मोहन्याल) व गणेश था । गणेश बुद्दि व कार्तिकेय (मोहन्याल) शक्ति के राजा देवता के रुपमे संसार प्रसिद्द है ।उनकी एक पुत्री थी वृंदा जो देवी लक्ष्मी की एक आंशिक अवतार थी।[1] वृंदा ने ६०,००० वर्षों तक तपस्या की थी। वृंदा के नाम पर ही इस स्थान को वृंदावन भी कहा जाता है। केदारनाथ — city — केदारनाथ कस्बे का दृश्य केदारनाथ कस्बे का दृश्य...

रुद्र देवता वैदिक वाङ्मय में एक शक्तिशाली देवता माने गये हैं।

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रुद्र देवता वैदिक वाङ्मय में एक शक्तिशाली देवता माने गये हैं। ये ऋग्वेद में वर्णन की मात्रात्मक दृष्टि से गौण देवता के रूप में ही वर्णित हैं।[1]ऋग्वेद में रुद्र की स्तुति 'बलवानों में सबसे अधिक बलवान' कहकर की गयी है।[2] यजुर्वेद का रुद्राध्याय रुद्र देवता को समर्पित है। इसके अन्तर्गत आया हुआ मंत्र शैव सम्प्रदाय में भी बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। रुद्र को ही कल्याणकारी होने से शिव कहा गया है।[3] वैदिक वाङ्मय में मुख्यतः एक ही रुद्र की बात कही गयी हैं; परन्तु पुराणों में एकादश रुद्र की मान्यता अत्यधिक प्रधान हो गयी है। वेदों में रुद्र का स्वरूप[4] संपादित करें वैदिक धर्म के देवतागण अनेक हैं। उनमें एक रुद्रदेवता भी हैं। वेदों में रुद्र नाम परमात्मा, जीवात्मा, तथा शूरवीर के लिए प्रयुक्त हुआ है। यजुर्वेद के रुद्राध्याय में रुद्र के अनंत रूप वर्णन किए हैं। इस वर्णन से पता चलता है कि यह संपूर्ण विश्व इन रुद्रों से भरा हुआ है। bholenath यास्काचार्य ने इस रुद्र देवता का परिचय इस प्रकार दिया है - रुद्रो रौतीति सत:, रोरूयमाणो द्रवतीति वा, रोदयतेर्वा, यदरुदंतद्रुद्रस्य रुद्...

भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं।

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भगवान शिव तथा उनके अवतारों को मानने वालों को शैव कहते हैं। [1]शैव में शाक्त, नाथ, दसनामी, नाग आदि उप संप्रदाय हैं। महाभारत में माहेश्वरों (शैव) के चार सम्प्रदाय बतलाए गए हैं: (i) शैव (ii) पाशुपत (iii) कालदमन (iv) कापालिक। शैवमत का मूलरूप ॠग्वेद में रुद्र की आराधना में हैं।[2] 12 रुद्रों में प्रमुख रुद्र ही आगे चलकर शिव, शंकर, भोलेनाथ और महादेव कहलाए। बहुत से शिव-मन्दिरों में शिव को योगमुद्रा में दर्शाया जाता है। शैव धर्म से जुड़ी महत्‍वपूर्ण जानकारी और तथ्‍य (1) भगवान शिव की पूजा करने वालों को शैव और शिव से संबंधित धर्म को शैवधर्म कहा जाता है। (2) शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों से मिलता है। (3) ऋग्वेद में शिव के लिए रुद्र नामक देवता का उल्लेख है। (4) अथर्ववेद में शिव को भव, शर्व, पशुपति और भूपति कहा जाता है। (5) लिंगपूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मत्स्यपुराण में मिलता है। (6) महाभारत के अनुशासन पर्व से भी लिंग पूजा का वर्णन मिलता है। (7) वामन पुराण में शैव संप्रदाय की संख्या चार बताई गई है: (i) पाशुपत (ii) काल्पलिक (iii) कालमुख (iv) ल...

शंकर या महादेव

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शंकर या   महादेव   आरण्य संस्कृति  जो आगे चल कर सनातन  शिव  धर्म (शैव धर्म) नाम से जाने जाती है में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ,  शंकर , महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधर आदि नामों से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है।  हिन्दू  शिव घर्म  शिव-धर्म के प्रमुख  देवताओं  में से हैं।  वेद  में इनका नाम  रुद्र  है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी ( शक्ति ) का नाम  पार्वती  है। इनके पुत्र  कार्तिकेय  और  गणेश  हैं, तथा पुत्री  अशोक सुंदरी  हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में  योगी  के रूप में देखे जाते हैं और उनकी  पूजा   शिवलिंग  तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में  नाग  देवता वासुकी विराजित हैं और हाथों में डमरू और  त्रिशूल  लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है...